स्वास्थ्य सुझाव

अर्जुन की छाल के फायदे और नुकसान

अर्जुन एक औषधीय पेड़ है जो भारत में आसानी से पाया जाता है। इसे घवल, ककुभ और नदीसर्ज आदि नामों से भी जाना जाता है। आइये जानते है अर्जुन की छाल के औषधीय गुण क्या होते हैं| क्या अर्जुन की छाल की चाय या काढ़ा पीने से कोई हानि हो सकती है| अर्जुन की छाल का प्रयोग नींद लाने में कैसे किया जाता है|

अर्जुन की छाल के गुण

अर्जुन की छाल हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, अत्यधिक रक्तस्त्राव व अन्य रोगों में लाभकारी है  जानिए इसका उपयोग कैसे करना है |

हृदय रोग में

हृदय रोग में अर्जुन का प्रयोग रामबाण हैं इसके लिये 10-15 ग्राम ताज़ी अर्जुन की छाल को कूटकर 200 300 ग्राम पानी में पकाए | जब वह एक चौथाई बच जाये तो उसे छानकर या बिना छाने दूध मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से आपकी हृदय की समस्या दूर होगी | और साथ ही हृदय की धडकन व एन्जिना के दर्द में भी लाभ होगा |

अगर आपको ताज़ी अर्जुन की छाल न मिले तो सुखी अर्जुन की छाल का पाउडर बना ले | फिर 5 ग्राम पाउडर को एक गिलास पानी में पकाये जब आधा पानी शेष रह जाए तो इसमें दूध मिलाकर सेवन करने से हृदय की शक्ति व कार्य क्षमता बढ़ेगी |

मुखपाक की व्याधि में

यदि आपके मुंह में फोले पड़ गये हैं सडन हो रही हो या मसूड़ों में परेशानी हैं तो अर्जुन की ताज़ी छाल को कूटकर काढ़ा बनाकर कुल्ला करने मुखपाक की व्याधि के साथ साथ संक्रमण भी ठीक हो जायेगा |

कान के रोगों में

यदि आपके कान में पीड़ा हैं तो अर्जुन की कोमल पत्तियों को तोडकर उनका रस निकालकर 4-4 बूंद कान में डालने से कान की पीड़ा में लाभ होता है | यह कान के रोगों में बहुत ही लाभकारी हैं

चेहरे की झाइयों में

जिनके चेहरे पर झाइयाँ या दाग हो गए है वे अर्जुन की छाल को चंदन की तरह घिसकर अपने चेहरे पर लगाये इससे झाईयां ठीक हो जाएँगी |

घबराहट, बेचैनी और नींद न आने में

जिनको बार बार घबराहट होती हैं, बेचैनी रहती हैं, रात को नींद नही आती व बीच बीच में नींद टूट जाती हैं वे अर्जुन की छाल को 5 ग्राम चूर्ण को उबालकर प्रतिदिन चाय की तरह पियें इससे आपकी घबराहट और बैचेनी खत्म होगी और हृदय, मस्तिष्क व मांशपेशियों को ताकत भी मिलेगी |

उच्चरक्त चाप, स्ट्रेस और सिरदर्द में

जिन लोगो को उच्चरक्त चाप की शिकायत हैं उनके लिये अर्जुन की छाल दिव्य औषिधि हैं | वे अर्जुन की छाल के 5 ग्राम चूर्ण को 200 ग्राम पानी में उबाले जब वह 50 ग्राम बच जाये तो उसे छानकर पियें | इससे उच्चरक्तचाप और इसकी वजह से होने वाले सिरदर्द में लाभ होगा और साथ ही आपका स्ट्रेस लेवल भी कम हो जायेगा

प्रमेह व प्रदर रोग में

जिन महिलाओं को प्रदर रोग हैं व पुरुषो को प्रमेह की शिकायत हैं वे 2 चम्मच अर्जुन के पाउडर को रात को पानी में भिगो दे फिर प्रात: काल उस पानी को पीये | इससे प्रमेह व प्रदर के रोग में लाभ होगा यदि आपको ज्यादा परेशानी हैं तो इसका काढ़ा बनाकर नियमित रूप से पियें |

अस्थि रोग में

अस्थि रोग में अर्जुन की छाल बहुत ही लाभकारी हैं जिनको हड्डी की परेशानी हैं, हड्डी टूट गयी हैं, जिनकी हड्डियाँ घिस गयी हैं व हड्डियों में आवाज होती हैं वे अर्जुन की छाल का काढ़ा बनाकर नियमित रूप से पिये इससे उनकी हड्डी जल्दी जुड़ जायेगी |

रक्तदोष में

जिनको रक्तदोष की शिकायत हैं वे अर्जुन, नीम व आंवले की छाल को पानी में उबाले और उबले पानी से त्वचा को धोएं | इससे रक्तदोष की शिकायत दूर हो जायेंगी |

बुखार, सर्दी, जुखाम, कफ, व, खांसी में

जिनको पुराना बुखार हैं और बुखार उतर नही रहा हैं वे अर्जुन की छाल 1-2 पत्ती नीम व तुलसी की 1-2 पत्ती को उबालकर काढ़ा बनाकर पियें इससे पुराने बुखार के साथ ही सर्दी, जुखाम, कफ, खांसी व इससे होने वाले बुखार में लाभ होगा |

पेट के रोगों मे

जिनको पेट की परेशानिया हैं आंत की शिकायत अमिबयोसिस हैं उन्हें अर्जुन की छाल का काढ़ा बनाकर पीना चाहिए | इससे आंत के साथ ही पेट संबंधी अन्य रोग भी दूर हो जाएंगे |

श्वेतकुष्ट में

श्वेतकुष्ट में अर्जुन की छाल बहुत ही लाभकारी है | जिनको त्वचा संबंधी परेशानी हैं, श्वेतकुष्ट हैं वे पुननर्वा की जड़, बावची व अर्जुन की छाल को पीसकर पेस्ट बना ले उस पेस्ट को श्वेतकुष्ट वाली जगह पर लगाये इससे कुछ ही दिनों में श्वेतकुष्ट ठीक हो जाएगा |

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