शायरी,  विचार

आज फिर वही से गुजरा हूं मैं, जहाँ कल गुजरता था

आज फिर वही से गुजरा हूं मैं,
जहाँ कल गुजरता था !!
उसी रास्ते पर उसी सड़क पर उसी गली पर…
जब कल गुजरता था चार लोग हाथ मिलाने वाले मिल जाते थे,
चार दोस्त गले लगाने वाले मिल जाते थे,
फिर में वही रुक जाता था कुछ पल के लिए,
चाय- पानी पीता था,
कभी कभी वो दोस्त बियर के लिए जिद कर लेते थे,
आज पीनी ही पीनी है,
में मना कर देता था पीने के लिए,
क्योंकि में बियर शराब को पीना तो दूर की बात में हाथ तक नही लगता था….
क्योंकि नशा हो जा शराब हो सेहत के लिए दोनों ही हानिकार होते है…
आज फिर वही से गुजरा हूं में..,
जहाँ कल गुजरा था !!

सबसे पहले उनका घर मोहला नज़र आया, जो मेरे साथ दोस्त स्कूल में पढ़ते थे।
वो दोस्त अक्शर कहते थे, की हमारे घर का यह रंग है, इस रंग का मैन गेट है।
यह देखने के लिए कुछ पल रुक गया…..
वो घर नज़र तो आया पर उस घर में कोई नही था,
मुझे खाली खाली सा लगने लगा,
बस पक्षियो की आवाज़ थी,
पक्षियो के घोंसलो में से ची – ची की आवाज़ आ रही थी,
ऐसा लगता था मेरे दोस्त का घर नही, यह चिड़िया घर है…?
आज वही से गुजरा हूं में…,
जहाँ कल गुजरा था !!

फिर चलते चलते उस घर की कुछ तस्वीरें लयी,
और फिर वाह से चल पड़ा अपने गांवो की तरफ़ की ओर,
फिर तुंरत मुझे ख्याल आया इसी चुहराये के पास एक तीर्थ नाम का मंदिर बना हुआ है, जो गीता स्कूल के पास था, जिसे मलु पट्टी चौपाल के नाम से भी जाना जाता है,
वाह भी दोस्त है जो मेरे साथ chat करता है।
वाह जाना तो चाया पर दिल ने मना कर दिया।
आज फिर वही से गुजरा हूं में…,
जहाँ कल गुजरा था !!

जरूरी नही हादसे मेरे साथ ही हो, किसी के साथ भी हो सकते है।
जरूरी नही मोहबत में मेरी आँखें नम हो, किसी की भी हो सकती है।
जो हमे यह कहते है कि आपकी कलम में दर्द ही दर्द नज़र आता है, यह दर्द आप लोगो का ही दिया हुआ है।
ना मुझे लिखना आता है, ना मैंने लिखने के लिये कभी कोशिश की है,
बस ये जरूर सुना है “कोशिश करने वालो की कभी हार नही होती”
आज फिर वही से गुजर में…,
जहाँ कल गुजरता था !!

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