शायरी

आज फिर देखा उसे

आज शाम फिर देखा उसे वह लगी थोड़ी बदली – बदली सी
कुछ चंचल कुछ कोमल कुछ पगली पगली सी
सुना है सौक अब सवरने का छोड़ दिया उसने
पर वो लाली लिपस्टिक की लापरवाही मुझे थोड़ी सी खल गई

 

पर वह जुल्फों की घटाए आज भी पहले की तरह लहराती है
हां उन गुनगुनाते हुए होठो पर मुझे आज थोड़ी चुपी चुपी सी लगी
वो इसारो से बात करने की आदत उसकी अब तक नहीं गई
पर वह हद से ज़्यदा बोलने – वाली आंखें मुझे देख के आज चुप रही

 

नूर रहता था कभी जिसके चेहरे पर मेरे नाम का
आजकल वह सिन्दूर लगाती किसी और के नाम का
हर बार रिश्ते बेवफाई से ही टूट जाय यह जरूरी नहीं दोस्तों
कुछ लोग माँ – बाप की इज्जत का ख्याल करके भी रिश्ते तोड़ देते है

 

लोगो का ख्याल रखते रखते वह खुद का ख्याल भूल गयी
पर आज गुजरी जब मेरी गली से तो वह फिर मेरा प्यार बन गई
आज फिर देखा उसे वह लगी थोड़ी बदली – बदली सी
कुछ चंचल कुछ कोमल कुछ पगली पगली सी

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