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तेरे होंठ हैं, मेरे शब्द हो

तेरे होंठ हैं, मेरे शब्द हो

 

तेरे होंठ हैं, मेरे शब्द हो
और अनकही सी बात हो
अहसास तेरा जो दे मुझे
ऐसी कभी बरसात हो

मै छोड़ता जग जा रहा
फिर भी मगर सब पा रहा
तेरे रूह मुझे है मिल गई
अब काया में क्या बचा रहा

महसूस कर न सके कोई,
वैसे अनगिनत जज्बात हो
तेरे होंठ हैं, मेरे शब्द हो
और अनकही सी बात हो

दिल था कहाँ इस अंग में
चल पड़ा था तेरे संग में
माटी सा बन गया हु मै
जो ढल रहा तेरे संग में

नजरे मिले और दिल खिले
ऐसा कभी एक साथ हो
तेरे होंठ हैं, मेरे शब्द हो
और अनकही सी बात हो
अहसास तेरा जो दे मुझे
ऐसी कभी बरसात हो

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