शायरी

पिता

                        पिता

क्या जानते हो, क्या है पिता ? एक मुकम्मल ज़िंदगी का रहनुमा है पिता,
माँ की ममता , सारा संसार है पिता , जो मिट ना सके , वो प्यार है पिता ।
क्या जानते हो, क्या है पिता? टूट कर भी ना गाँठ आए वो डोर है पिता,
मुश्किलों में आस, अंधेरे में भोर है पिता, धर्म भी करम भी, खुदा का दूजा छोर है पिता।

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