• शायरी

    कोन हू में?

    हर हर गंगे का उदघोष हूँ में, जीवन में मृत्यु का अवशेष हू में, पत्थर पत्थर में जहां शिव निवासे उस अविनाशी में जीवन प्रत्यक्ष हूँ में, अस्सी का उल्लास हूँ में, पञ्चगंगा का नीरव घाट हूँ में, धारा जहां विचलित चरण प्रच्छालन को वैराग्य हू में, समाहितमर्णिका का प्रवास हूँ में, सृष्टि का आरम्भ हूँ में, ब्रम्हांड का सूक्ष्म कणाशेष हूँ में, मान मर्दन कर तू मानस अविवेकी, के महाकाल औघड़ का भयंकर तंत्र तांडव हूँ में, मुर्दनी का उल्लास हूँ में, मैं घोर उल्लास में जीवित लाश हूँ में, करुण क्रंदन से मचा हाहाकार, जहां नव प्रारब्ध को विनाश __का अट्टाहास हूँ मैं, सरस्वती का अवतार हूँ मैं,…

  • शायरी

    पिता

                            पिता क्या जानते हो, क्या है पिता ? एक मुकम्मल ज़िंदगी का रहनुमा है पिता, माँ की ममता , सारा संसार है पिता , जो मिट ना सके , वो प्यार है पिता । क्या जानते हो, क्या है पिता? टूट कर भी ना गाँठ आए वो डोर है पिता, मुश्किलों में आस, अंधेरे में भोर है पिता, धर्म भी करम भी, खुदा का दूजा छोर है पिता।

  • शायरी

    खाली जेब

                                   खाली जेब ने मुझे सिखाया है   खाली जेब ने मुझे बहुत कुछ दिखाया है, दुश्मनो ने पीठ पीछे वार कर अपना रिश्ता बनाया है, पर अपनो ने तो गले लगाकर दिल पर तीर चलाया है। गिरगिट को रंग बदलते देखा था, जब अपनो को रंग बदलता देखा, तो मुझे इंसानियत पर रोना आया है। प्यार करने वालों ने भी खूब अंदाज़ में साथ निभाया है, रोता हुआ देखकर दूर से ही कदम पीछे हटाया है। भला करा जो भगवान तूने मुझे खाली जेब और अच्छे दिल के साथ दुनिया मे भेजा, क्योंकि अच्छे दिल…

  • शायरी

    आख़िर ग़लती क्या थी मेरी

                    आख़िर ग़लती क्या थी मेरी               मैंने बस तुझे चाहा बस तेरा बन के रहा क्या सजा मुझे इसी बात की मिली त ही बता दे आखिर गलती क्या थी मेरी मैंने कभी खुद को ना सोचा तेरे बनने से पहले कोई खुशी ना थी मेरी तरह खुश होने से पहले क्या सजा तुझे खुश रखने की मुझे मिली आखिर तू ही बता दे गलती क्या थी मेरी तू मेरी ना बन सकी इस बात का मुझे गम नहीं पर मैंने शक किया तुझ पर मुझ पे इल्जाम भी तो कम नहीं क्या तुम बेवफा थी…

  • शायरी

    में ख़ुद में एक प्रकाश हू

                                                                      में भस्म आग की नहीं में ख़ुद में एक प्रकाश हू                                में राम का एक बाण हू                                 रावण सा एक ज्ञान हू                             अर्जुन सा मेरा लक्ष्य हे          …

  • शायरी

    तूने कहा था

                                                   तूने कहा था तू वापस आएगी जरूर                           तूने कहा था तू वापस आएगी जरूर                       बस तेरे इंतजार में जिंदगी बिता रहा हूं मैं                 कोई पूछे जीने की वजह तो बड़ी शान से कहता हूं                    तुझसे किए कुछ वादे आजकल निभा रहा हूं मैं      …

  • शायरी

    पता नहीं

                 पता नहीं   तूने पूछा मेरे दिल का हाल मैंने बस कहा पता नहीं। नींद क्यों नहीं आती आजकल रातों में क्यों दर्द उठता है सीने में पता नहीं। तुझसे लिपटकर क्यों रोने को दिल चाहता है पता नहीं। तन्हाई का आलम कुछ यूँ है रूह भी मेरी मुझसे जुदा है क्यों कुछ अधूरा सा हूँ पता नहीं। कहना होता है बहुत कुछ पर कुछ न कह पता हूँ तेरे इस सवाल का जवाब नहीं है मेरे पास, अब क्यों पता नहीं। इतनी बेइंतहां मोहब्बत तुझसे कब हुई पता नहीं। तेरे हर दर्द पर आंसू मेरे भी आते हैं तेरी हर ख़ुशी पर होंठ…

  • शायरी

    मैने इंसान बदलते देखा है

       जिंदगी में कुछ देखा हो, ना देखा हो… मैंने लोगो को बदलते देखा हे… जो केहता था मै ना झुकूंगा किसीके आगे उसे मंदिर में सिर झुकाते देखा है…   मैंने आमिर को पैसे के लिए गरीब से लड़ते देखा है… सच्चाई का पाठ पड़ने वालो को, मैंने पैसो के लिए बिकते देखा है… मैंने सच्चे यारो को पीठ में खंजर भोंकते देखा है…     आसमान छूती इमारतों को मैंने धूल चाटते देखा है, मैं ने एक अकेली माँ लो अपने बच्चे के लिए लड़ते देखा है बचपन के आसिको को नफरत करते देखा है मैंने जलन के मारे भाईओ को आपस में लड़ते देखा है…    …

  • शायरी

    आज फिर देखा उसे

    आज शाम फिर देखा उसे वह लगी थोड़ी बदली – बदली सी कुछ चंचल कुछ कोमल कुछ पगली पगली सी सुना है सौक अब सवरने का छोड़ दिया उसने पर वो लाली लिपस्टिक की लापरवाही मुझे थोड़ी सी खल गई   पर वह जुल्फों की घटाए आज भी पहले की तरह लहराती है हां उन गुनगुनाते हुए होठो पर मुझे आज थोड़ी चुपी चुपी सी लगी वो इसारो से बात करने की आदत उसकी अब तक नहीं गई पर वह हद से ज़्यदा बोलने – वाली आंखें मुझे देख के आज चुप रही   नूर रहता था कभी जिसके चेहरे पर मेरे नाम का आजकल वह सिन्दूर लगाती किसी और…

  • शायरी

    हैट लीडर

    “टोपी वाला नेता” न तो मेरा दोस्त और न ही आपका दोस्त “हैट लीडर” वोट के बाद “टोपी नेता” कहाँ जाता है? न तो मेरा दोस्त और न ही आपका दोस्त “हैट लीडर” 👷🏻👷🏻👷🏻👷🏻👷🏻 उनका कोई धर्म, कोई पंथ, कोई उद्देश्य नहीं है। आत्महत्या – गरीबी और दुर्भाग्य नहीं देखा जाता है। क्या वे जानते हैं कि एक कीड़ा क्या है? मेरे दोस्त नहीं …….. अपने दोस्त “टोपी नेता” नहीं 👷🏻👷🏻👷🏻👷🏻👷🏻 कुछ कहते हैं और कुछ करते हैं। यह लेद्रा की चाल है। आप घाटियों और सीधे उत्तर से क्या समझते हैं? यह अच्छा नहीं है कि उनका चरित्र एक “हैट लीडर” है। मेरे दोस्त नहीं …. तुम्हारे दोस्त टोपी…