सुना है बारिश के पानी का कोई रंग नहीं होता
विचार

सुना है बारिश के पानी का कोई रंग नहीं होता

सुना है
बारिश के पानी का
कोई रंग नहीं होता,
वह बरसता है
हर जमीन
हर पौधे
हर गमले पर,
सच में
अस्तित्व तो बिन बोले
मौन में
न्योछावर कर देता है
अपना प्यार
अपनी ममता
पूरी कायनात पर
बड़े ही प्रेम से
बिना अकड़ के
बिना किसी सेल्फी के,
लेकिन मानव
अहंकार का पोषण करता है
दान का दावा करता है
फोटो खिंचवा कर,
दीनता की ख़ुद्दारी पर
प्रहार करता है,
कुछ
बगुला भगत मानव
बन के हंस
नज़र आ रहे हैं
दान के साथ साथ
नाम कमा रहे हैं,
थमा के खाना
यह लोग
सेल्फी खिंचवा रहे हैं।

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